भारत में पुनर्योजी खेती: तकनीक, टिकाऊ तरीकों और सरकारी योजनाओं से बदलती कृषि की दिशा

हरी-भरी खेतों में खड़ा भारतीय किसान, सिर पर नारंगी पगड़ी और कंधे पर हल लिए हुए, जो परंपरागत खेती की मेहनत और गर्व को दर्शाता है।

भारत में पुनर्योजी खेती आज भारतीय कृषि के भविष्य को दिशा देने वाली सबसे अहम अवधारणा बन चुकी है। भारत हमेशा से कृषि प्रधान देश रहा है, जहाँ आधे से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में खेती कई नई चुनौतियों से घिर गई है – जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की उर्वरता में कमी, जल संकट, रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग और लगातार बढ़ती लागत। ऐसे में किसान और नीति निर्माता दोनों ही मान रहे हैं कि खेती को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण मित्र बनाने का रास्ता केवल पुनर्योजी खेती (Regenerative Farming) से होकर जाता है।

पुनर्योजी खेती सिर्फ पारंपरिक जैविक खेती का विस्तार नहीं है। यह खेती की एक ऐसी आधुनिक सोच है जिसमें नई तकनीक, टिकाऊ पद्धतियाँ, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलकर काम करते हैं। यह खेती मिट्टी की सेहत को बहाल करती है, पानी की बचत करती है, फसल की गुणवत्ता बढ़ाती है और किसानों को लंबी अवधि में आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है।

ड्रोन तकनीक: खेती में आसमान से आई मदद

भारत में पुनर्योजी खेती को आधुनिक तकनीक ने नई उड़ान दी है और इसमें ड्रोन सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

  • कैसे मदद कर रहे हैं ड्रोन?
    ड्रोन की मदद से किसान खेतों पर कीटनाशकों, उर्वरकों और पोषक तत्वों का सटीक और समान छिड़काव कर सकते हैं। यह तरीका न केवल समय और श्रम की बचत करता है बल्कि खर्च भी घटाता है।
  • किसान इसका उपयोग कैसे करें?
    कई राज्यों के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और निजी सेवा प्रदाता अब ड्रोन को किराए पर उपलब्ध कराते हैं। किसानों को बस बुकिंग करानी होती है और प्रशिक्षित तकनीशियन उनके खेतों में ड्रोन से छिड़काव कर देता है।
  • लाभ क्या हैं?
    ड्रोन से काम जल्दी होता है, बड़े क्षेत्रों को आसानी से कवर किया जा सकता है और खेत में ज्यादा मजदूर रखने की जरूरत नहीं रहती।

अधिक जानकारी के लिए देखें: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)

स्मार्ट सेंसर और डेटा आधारित खेती

FAO India Report के अनुसार, स्मार्ट सेंसर खेती को टिकाऊ बनाने और संसाधनों की बचत के लिए भविष्य की सबसे अहम तकनीक है।

खेती में स्मार्ट सेंसर अब तकनीकी क्रांति ला रहे हैं। ये IoT (Internet of Things) डिवाइस मिट्टी की नमी, pH स्तर, तापमान और पोषक तत्वों की रियल-टाइम जानकारी किसान के मोबाइल पर भेजते हैं।

  • क्यों जरूरी हैं स्मार्ट सेंसर?
    यह किसान को सही समय पर सिंचाई, खाद डालने और अन्य कृषि कार्य करने में मदद करते हैं।
  • भारत में पुनर्योजी खेती में इनका योगदान:
    स्मार्ट सेंसर से किसान पानी और उर्वरकों का उपयोग कम कर सकते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है और लागत घटती है।
भारत में पुनर्योजी खेती: सूर्यास्त की सुनहरी रोशनी में हरे धान के खेत में खड़ा भारतीय किसान, सिर पर रंग-बिरंगी पगड़ी और हाथ बांधे हुए, जो ग्रामीण जीवन की मेहनत और गर्व को दर्शाता है।

प्रिसिजन फार्मिंग: हर इंच की सही देखभाल

GPS आधारित प्रिसिजन फार्मिंग एक ऐसी विधि है जिसमें खेत के हर हिस्से की जरूरत के हिसाब से खाद, बीज और पानी दिया जाता है।

  • लाभ:
    इससे कृषि निवेश की बर्बादी रुकती है, उत्पादन बढ़ता है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचता।
  • क्यों महत्वपूर्ण है?
    भारत में पुनर्योजी खेती को प्रिसिजन फार्मिंग से बहुत लाभ मिलता है, क्योंकि यह तकनीक मिट्टी और संसाधनों को बचाती है।

टिकाऊ सिंचाई: पानी की हर बूंद का महत्व

आज पानी की कमी खेती के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकें बेहद जरूरी हो गई हैं।

  • फायदे क्या हैं?
    इन तकनीकों से 30-70% तक पानी की बचत होती है, फसल को लगातार नमी मिलती है और रोगों का खतरा भी कम होता है।
  • सरकारी मदद कैसे मिलेगी?
    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं से किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर सब्सिडी मिलती है।

जैविक खाद और रासायनिक खाद का संतुलन

रासायनिक खाद बनाम जैविक खाद – असली बहस:

  • रासायनिक खाद तुरंत असर दिखाती है, लेकिन मिट्टी की उर्वरता घटाती है और लंबे समय में उसकी संरचना बिगाड़ देती है।
  • जैविक खाद मिट्टी को पोषण देती है, सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करती है और फसल को प्राकृतिक मजबूती देती है, लेकिन असर धीरे-धीरे दिखता है।

समाधान – संयोजित खाद प्रबंधन (Integrated Nutrient Management):
इस तकनीक में रासायनिक और जैविक दोनों खादों का संतुलित उपयोग होता है। इससे मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है और फसल की पैदावार भी अच्छी होती है। यह तरीका भारत में पुनर्योजी खेती का असली आधार है।

डिजिटल मंडियाँ और सीधा बाजार संपर्क

आज किसान को सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि अपनी उपज बेचने के लिए भी आधुनिक साधनों की जरूरत है।

  • ई-नाम (e-NAM) क्या है?
    यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ता है।
  • क्यों महत्वपूर्ण है?
    इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलता है।
  • भारत में पुनर्योजी खेती के लिए इसका महत्व:
    जब किसान को सीधे बाजार से बेहतर दाम मिलते हैं, तो टिकाऊ खेती के लिए निवेश करना आसान हो जाता है।

सरकारी योजनाएँ और किसानों की सामूहिक ताकत

भारत सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं:

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan): हर छोटे किसान को सालाना ₹6000 की मदद।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: मिट्टी की जांच कर सही खाद का सुझाव।
  • कृषि अवसंरचना फंड: गोदाम और कोल्ड स्टोरेज के लिए आसान ऋण।
  • राष्ट्रीय जैविक कृषि मिशन: जैविक खेती को बढ़ावा और प्रशिक्षण।
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO): सामूहिक खेती और विपणन की ताकत।

ये सारी पहलें सीधे भारत में पुनर्योजी खेती के भविष्य को मजबूत कर रही हैं।

भारत में पुनर्योजी खेती अब केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। यह खेती का ऐसा रास्ता है जो मिट्टी की सेहत सुधारता है, जल बचाता है, फसल की गुणवत्ता बढ़ाता है और किसान की जेब मजबूत करता है।

अगर किसान मिट्टी की जांच करवाएं, तकनीक अपनाएं, सरकारी योजनाओं का लाभ लें और डिजिटल बाजारों से जुड़ें, तो खेती न केवल टिकाऊ बल्कि अत्यधिक लाभकारी भी बनेगी। यही बदलाव भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा और पूरी दुनिया को सस्टेनेबल फार्मिंग का मॉडल प्रदान करेगा।

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