चित्रकूट पर्यटन सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक अनुभव है। यह वही पवित्र भूमि है जहाँ भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने 14 वर्षों के वनवास में से 11 वर्ष बिताए। यहाँ का हर घाट, हर मंदिर और हर पहाड़ी मानो रामायण की गाथा सुनाता है।
वाल्मीकि रामायण से लेकर तुलसीदास की रामचरितमानस तक, चित्रकूट को “तीर्थों की रानी” कहा गया है क्योंकि यहाँ धर्म, अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम है।
रामायण और चित्रकूट – एक अविभाज्य रिश्ता
- वाल्मीकि रामायण में चित्रकूट का बार-बार उल्लेख है।
- वनवास के प्रारंभ में राम, सीता और लक्ष्मण सबसे पहले चित्रकूट आए और यहाँ कुटिया बनाकर रहने लगे।
- यही वह स्थान है जहाँ भरत राम को अयोध्या लौटने का आग्रह करने आए थे।
- रामायण के अनेक प्रसंग चित्रकूट से जुड़े हैं, जैसे कामदगिरि पर्वत, रामघाट, वाल्मीकि आश्रम और सती अनुसुइया आश्रम।
कामदगिरि पर्वत – आस्था का केंद्र
कामदगिरि पर्वत चित्रकूट की आत्मा है।
- अर्थ: कामदगिरि का अर्थ है कामना पूरी करने वाला पर्वत।
- धार्मिक महत्व: मान्यता है कि भगवान राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ यहीं निवास किया।
- परिक्रमा: लगभग 5 किलोमीटर की परिक्रमा भक्त श्रद्धा से नंगे पाँव करते हैं। कुछ भक्त दंडवत प्रणाम करते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं।
- मंदिर और आश्रम: परिक्रमा मार्ग पर भारत मिलाप मंदिर, वाल्मीकि आश्रम, लक्ष्मण पाही मंदिर और कई अन्य मंदिर स्थित हैं।
- अनुभव: परिक्रमा के दौरान “जय श्रीराम” की गूंज और मंदिरों की घंटियाँ एक अलौकिक माहौल बना देती हैं।

चित्रकूट पर्यटन: रामघाट – मंदाकिनी की गोद में
रामघाट चित्रकूट का सबसे प्रसिद्ध घाट है।
- कथा: कहा जाता है कि भगवान राम, सीता और लक्ष्मण यहाँ स्नान करते थे और भरत यहीं उनसे मिलने आए थे।
- आरती: हर शाम यहाँ दीप आरती होती है। सैकड़ों दीपक मंदाकिनी नदी में बहाए जाते हैं और पूरा घाट प्रकाश से जगमगा उठता है।
- अनुभव: नदी का किनारा आरती के समय आध्यात्मिक अनुभव में बदल जाता है।
हनुमान धारा – आस्था और रोमांच का संगम
हनुमान धारा चित्रकूट की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है।
- कथा: मान्यता है कि हनुमान जी ने लंका दहन के बाद अपनी तपन को शांत करने के लिए यहाँ स्नान किया और भगवान राम ने इस जलधारा को प्रकट किया।
- दृश्य: एक पतली जलधारा पहाड़ी से गिरती है और उसके चारों ओर हरियाली और शांति का वातावरण है।
- अनुभव: ऊपर से दिखाई देती घाटी मन को मोह लेती है।
गुप्त गोदावरी गुफाएँ – रहस्य और शांति का अनुभव
- यहाँ दो गुफाएँ हैं, जिनमें से एक में ठंडी जलधारा बहती है।
- कहा जाता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने यहाँ दरबार लगाया था।
- गुफाओं में उतरते ही ठंडी हवा और पानी की आवाज़ मन को रोमांचित कर देती है।
चित्रकूट पर्यटन: सबरी जलप्रपात – चित्रकूट का प्राकृतिक गहना
सबरी जलप्रपात चित्रकूट का एक अद्भुत नेचर स्पॉट है।
- तथ्य: यह एक प्राकृतिक झरना है, जिसका नाम माता शबरी की भक्ति के सम्मान में रखा गया है।
- सही जानकारी: यहाँ राम और शबरी के मिलने का कोई धार्मिक प्रमाण नहीं है। यह केवल नेचर-बेस्ड टूरिस्ट डेस्टिनेशन है।
- दृश्य: बरसात के मौसम में जब पानी पूरी रफ्तार से गिरता है तो चारों ओर धुंध छा जाती है।
- अनुभव: झरने की आवाज़, ठंडी हवा और गिरती बूंदें मन को ताजगी और सुकून देती हैं।
सती अनुसुइया आश्रम – मातृत्व और करुणा का प्रतीक
यहाँ माता अनुसुइया ने तपस्या की थी।
- धार्मिक महत्व: माना जाता है कि माता अनुसुइया ने त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को प्रसन्न किया था।
- अनुभव: यहाँ की शांति और हरियाली ध्यान और साधना के लिए आदर्श है।
चित्रकूट पर्यटन: संस्कृति और सभ्यता
चित्रकूट की संस्कृति उसकी पहचान है।
- भाषा: यहाँ बुंदेली और अवधी का संगम है।
- त्योहार: राम नवमी, दीपावली, मकर संक्रांति और भरत मिलाप मेला यहाँ की सांस्कृतिक धड़कन हैं।
- लोककला: यहाँ की लोककला में धार्मिक चित्रकला, लकड़ी की नक्काशी और मिट्टी के बर्तन शामिल हैं।
चित्रकूट पर्यटन: लोग और उनका जीवन
- जीवनशैली: अधिकांश लोग खेती, छोटे व्यापार और तीर्थ पर्यटन से जुड़े हैं।
- सरलता: यहाँ के लोग सरल और धार्मिक प्रवृत्ति के हैं।
- आतिथ्य: अतिथि को देवता मानने की परंपरा यहाँ आज भी जीवित है।
- खानपान: कचौड़ी, जलेबी, पूड़ी-सब्ज़ी और देसी मिठाइयाँ पर्यटकों को लुभाती हैं।

चित्रकूट पर्यटन: क्या करें
- कामदगिरि की परिक्रमा करें।
- रामघाट की शाम की आरती देखें।
- सबरी जलप्रपात पर समय बिताएँ और नेचर फोटोग्राफी करें।
- हनुमान धारा और गुप्त गोदावरी गुफाओं की यात्रा करें।
- स्थानीय व्यंजन चखें और हस्तशिल्प की खरीदारी करें।
चित्रकूट पर्यटन: कैसे पहुँचे
- रेल मार्ग: चित्रकूट धाम करवी स्टेशन प्रयागराज, झांसी और सतना से जुड़ा है।
- सड़क मार्ग: प्रयागराज (125 किमी), बांदा (70 किमी) और सतना (75 किमी)।
- हवाई मार्ग: प्रयागराज (135 किमी) और खजुराहो (175 किमी) निकटतम एयरपोर्ट हैं।
चित्रकूट पर्यटन: घूमने का सही समय
- अक्टूबर से मार्च: ठंडा और सुखद मौसम।
- जुलाई से सितंबर: झरनों और हरियाली का चरम रूप।
- त्योहारों के दौरान: राम नवमी और दीपावली पर विशेष आयोजन।
चित्रकूट पर्यटन: क्यों जाएँ
चित्रकूट एक ऐसा स्थल है जो केवल एक जगह नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक और प्राकृतिक यात्रा है।
यहाँ का हर घाट, हर मंदिर, हर झरना और हर गुफा आपको एक नई कहानी सुनाता है।
यह वही भूमि है जहाँ धर्म, अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम है।
चित्रकूट पर्यटन: यही कारण है कि चित्रकूट को “तीर्थों की रानी” कहा जाता है — यह हर यात्री को भक्ति, शांति और प्रेरणा देकर लौटाता है।
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