डिजिटल रेप: गंभीर अपराध पर न्यायपालिका की सख्त चेतावनी और BNS 2023 की कड़ी सज़ा

Indian courtroom symbolic image with judge’s gavel and scales of justice, representing strict digital rape laws under BNS 2023

भारत में यौन अपराधों की परिभाषा समय-समय पर बदलती रही है। हाल के वर्षों में अदालतों के कई फैसलों में एक शब्द बार-बार सामने आया है — “डिजिटल रेप”। आम जनता के बीच यह शब्द अक्सर गलतफहमी पैदा करता है, क्योंकि बहुत से लोग इसे तकनीक या इंटरनेट से जोड़कर देखते हैं। जबकि हकीकत यह है कि डिजिटल रेप का अर्थ पूरी तरह अलग और कानूनी दृष्टि से बेहद गंभीर है।

डिजिटल रेप की सटीक परिभाषा

डिजिटल रेप वह अपराध है, जिसमें किसी महिला या बच्ची की सहमति के बिना उसके निजी अंगों में उंगली या किसी वस्तु का प्रवेश कराया जाता है। यहाँ “डिजिटल” शब्द का अर्थ इंटरनेट या टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि लैटिन भाषा के शब्द Digitus से लिया गया है, जिसका मतलब है “उंगली” (Finger)
इस परिभाषा ने यह साफ़ कर दिया कि यौन अपराध केवल पेनिस पेनेट्रेशन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसी भी प्रकार का असहमति वाला प्रवेश — चाहे वह उंगली से हो या वस्तु से — भी रेप की श्रेणी में आता है।

अदालतों में “डिजिटल रेप” शब्द का इस्तेमाल

भारत की विभिन्न अदालतों ने हाल के वर्षों में अपने निर्णयों में डिजिटल रेप शब्द का उल्लेख किया है।

  • दिल्ली, 2014 का मामला (फैसला 2021): चार साल की बच्ची के साथ हुए अपराध में दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे “डिजिटल बलात्कार” मानते हुए दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद सुनाई।
  • गौतम बुद्ध नगर, 2025: ज़िला अदालत ने एक व्यक्ति को डिजिटल रेप का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा दी।
    इन मामलों से स्पष्ट है कि न्यायपालिका अब डिजिटल रेप को स्पष्ट और गंभीर यौन अपराध मानती है।

कानून में डिजिटल रेप

निर्भया कांड (2012) के बाद हुए क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 2013 ने इस अपराध को रेप की परिभाषा में शामिल किया। पहले केवल पेनिस पेनेट्रेशन को रेप माना जाता था, लेकिन अब उंगली या किसी वस्तु द्वारा असहमति से किया गया प्रवेश भी रेप है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) में यह प्रावधान और अधिक स्पष्ट कर दिया गया है:

  • धारा 63: बलात्कार की परिभाषा, जिसमें डिजिटल रेप शामिल है।
  • धारा 64: डिजिटल रेप जैसे मामलों में न्यूनतम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा।
  • धारा 65 (2): यदि पीड़िता 12 वर्ष से कम है तो सज़ा कम से कम 20 साल, अधिकतम आजीवन कारावास या मृत्युदंड

डिजिटल रेप की सज़ा

पुलिस और मेडिकल जांच की भूमिका

डिजिटल रेप मामलों में पुलिस की कार्यवाही बेहद महत्वपूर्ण होती है।

  • तुरंत FIR दर्ज करना
  • पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और फॉरेंसिक सैंपल लेना।
  • मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराना।
    विशेषज्ञ मानते हैं कि कई बार मेडिकल रिपोर्ट में चोट का उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अपराध नहीं हुआ। कानून स्पष्ट कहता है कि रेप साबित करने के लिए चोट का होना आवश्यक नहीं है
ल रेप: Symbolic representation of digital rape awareness in India, showing distress and violation, highlighting strict legal action under BNS 2023
यौन हिंसा का सच

मानसिक और सामाजिक प्रभाव

डिजिटल रेप पीड़िता के लिए उतना ही आघातकारी होता है जितना किसी भी अन्य प्रकार का रेप।

  • पीड़िता लंबे समय तक भय, आघात और मानसिक तनाव झेलती है।
  • समाज में इस अपराध को अक्सर कमतर समझा जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि इसके परिणाम उतने ही गंभीर हैं।
    विशेषज्ञ वकील मानते हैं कि इस अपराध को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना ज़रूरी है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और अपराधी को कठोर दंड मिलना सुनिश्चित हो।

जागरूकता और रोकथाम

  • बच्चों को गुड टच और बैड टच की शिक्षा प्रारंभ से दी जानी चाहिए।
  • महिलाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि ऐसे अपराधों में कानून उनके साथ है।
  • समाज को पीड़िता को दोष देने की बजाय उसका समर्थन करना चाहिए।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: डिजिटल रेप क्या है?
👉 यह वह अपराध है जिसमें बिना सहमति के उंगली या किसी वस्तु से महिला या बच्ची के निजी अंगों में प्रवेश कराया जाता है।

Q2: क्या डिजिटल रेप भी रेप माना जाता है?
👉 हाँ, कानून में इसे स्पष्ट रूप से रेप की श्रेणी में रखा गया है और इसकी सज़ा भी उतनी ही कठोर है।

Q3: डिजिटल रेप की न्यूनतम और अधिकतम सज़ा क्या है?
👉 न्यूनतम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास, जबकि 12 साल से कम बच्ची के मामले में मृत्युदंड तक हो सकता है।

Q4: क्या मेडिकल रिपोर्ट में चोट न होने पर भी केस साबित हो सकता है?
👉 हाँ, पीड़िता का बयान सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य है। चोट का होना अनिवार्य नहीं है।

Q5: समाज की भूमिका क्या होनी चाहिए?
👉 समाज को यह समझना चाहिए कि डिजिटल रेप कोई “हल्का अपराध” नहीं है। इसे गंभीरता से लेना और पीड़िता को समर्थन देना ज़रूरी है।

Symbolic image of Indian justice system with judge’s gavel, law book (Indian Penal Code), and scales of justice, representing डिजिटल रेप कानून और strict punishment under BNS 2023.
डिजिटल रेप कानून

डिजिटल रेप शब्द ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी रूप में की गई असहमति वाली यौन हिंसा को कानून बर्दाश्त नहीं करता। अदालतों के हालिया फैसले और BNS 2023 के प्रावधान यह संदेश देते हैं कि ऐसे अपराधों में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
समाज की ज़िम्मेदारी है कि वह इस अपराध को गंभीरता से ले, जागरूकता फैलाए और पीड़िताओं को न्याय दिलाने में सहायक बने।

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